Sanchi Constituency: ‘अपने-पराए’ की कलह से ‘साँची’ भी अछूती नहीं

रवि अवस्थी,भोपाल। Sanchi Constituency: रायसेन जिले की सांची विधानसभा सीट..राजनीतिक लिहाज से यह सीट जितनी अहम है..उतना ही इसका ऐतिहासिक महत्व भी है..ऐतिहासिक बौद्ध स्तूपों के लिए सांची का नाम पूरी दुनिया में मशहूर है..बीते चार दशकों की यहां की सियासत पर गौर करें तो चुनाव में मुकाबला दो नामी डॉक्टरों के बीच रहा..दोनों ने ही 27 वर्ष की उम्र में राजनीति Politics में प्रवेश किया..सालों तक धुर विरोधी रहे..और अब एक मंच पर हैं..। यह वह सीट है जिसने प्रदेश को कैबिनेट मंत्री दिए तो नेता प्रतिपक्ष भी।

ये हैं सांची के विश्व प्रसिद्ध स्तूप Stupa..जो ईसा के तीसरी से बारहवीं सदी के बीच बनाए गए…दुनियाभर के बौद्ध अनुयायी इन प्राचीन स्तूपों को देखने सांची पहुंचते हैं..दुनिया का पहला बौद्ध विश्वविद्यालय भी सांची में स्थापित किया गया है..भोपाल के नजदीक होने से हर साल बडी संख्या में पर्यटक सांची पहुंचते हैं और उन्हें कौतूहल से निहारते हैं..मौजूदा सियासी परिदृश्य में सांची विधानसभा सीट को लेकर कौतूहल कम नहीं..

पहले यह दो चिकित्सकों के बीच के मुकाबले को लेकर चर्चा में हुआ करती थी और अब दोनों के एक मंच पर रहते हुए परस्पर जड़ें काटने को लेकर..जी हां,यहां बात हो रही है..सांची से सात बार के विधायक डॉ गौरी शंकर शेजवार(Photo) और कभी उनके धुर विरोधी रहे डॉ प्रभुराम चौधरी की..दोनों के बीच एक बात समान है कि दोनों पेशे से डॉक्टर रहे और दोनों ने 27 वर्ष की उम्र में पहला चुनाव लड़ा और जीता भी..

सांची विधानसभा क्षेत्र में पहले जनसंघ व बाद में भाजपा की जड़ें मजबूत करने में डॉ शेजवार की अहम भूमिका रही..उन्होंने 9 बार चुनाव लडा और सात बार जीते..डॉ प्रभुराम व डॉ शेजवार के बीच पांच बार सीधा मुकाबला रहा..

इसमें दो बार  डॉ प्रभुराम चौधरी (photo)को जीत मिली और एक बार उनके बेटे मुदित शेजवार के खिलाफ.. सन 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम में दिल और दल बदलने पर उपचुनाव में उन्होंने ऐतिहासिक 63 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की..डॉ चौधरी वर्तमान में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री हैं..।
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साँची के जातिगत समीकरण

कुल मतदाता        2,49,218
पुरुष मतदाता      1,31,758
महिला मतदाता   1,17,460

.लोधी:        26 हजार,
मीणा:       08 हजार,
अजा :      25 हजार,
मुस्लिम:    27 हजार,
ब्राह्मण:     04 हजार,
ठाकुर:      08 हजार,
कुर्मी:       18 हजार,
किरार:     17 हजार,
साहू:        08 हजार
कुशवाहा: 08 हजार

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जातिगत समीकरण नहीं ,पार्टी प्रभावी

सांची रायसेन जिले Raisen district की एकमात्र आरक्षित सीट Reserve seat है..इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया..हालांकि इस वर्ग के मतदाताओं की संख्या करीब 25 हजार ही है..जबकि मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 27 हजार से अधिक…इसी तरह अन्य वर्गों के मतदाताओं की बात करें तो कुर्मी,किरार,कुशवाहा,ठाकुर व ब्राह्मण मतदाताओं की भी अच्छी खासी संख्या है..यानी जातिगत समीकरण इस सीट पर कोई मायने नहीं रखते..

विभिन्न वर्गों के मतदाताओं Voters की लगभग 19.20 संख्या के बावजूद जीत का सेहरा आरक्षित श्रेणी के विजयी उम्मीदवार के सिर ही बंधता रहा है.. करीब ढाई लाख मतदाता वाली सांची विधानसभा में जिला मुख्यालय रायसेन सहित आधा दर्जन कस्बे सांची,गैरतगंज,खरबई,सांचेत,देवगांव आदि शामिल है..सांची के मतदाता काफी जागरूक है..और यहां हमेशा बंपर वोटिंग होती रही है..इसके चलते अंतिम समय तक चुनाव नतीजे को लेकर कश्मकश की स्थिति लगभग हर चुनाव में देखी गई…
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कुल मतदाता        2,49,218
पुरुष मतदाता      1,31,758
महिला मतदाता   1,17,460
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मुकाबला दो डॉक्टरों के बीच

..प्रभुराम चौधरी और गौरीशंकर शेजवार के बीच 5 बार विधानसभा चुनाव की जंग हुई..

..जिनमें 3 बार डॉ शेजवार तो 2 बार डॉ चौधरी ने जीत दर्ज की..

-साल 1985 में प्रभुराम चौधरी Prabhuram Choudhry और गौरीशंकर शेजवार के बीच पहला चुनावी मुकाबला हुआ। इसमें

चौधरी ने शेजवार को 3635 मतों से शिकस्त दी।

– साल 1993 के चुनाव में डॉ शेजवार Dr. Gaurishankar shejwar व डॉ चौधरी आमने— सामने रहे लेकिन इस बार बाजी पलटी

और चौधरी को 16941 मतों से शिकस्त हाथ लगी।

– इन दोनों दिग्गजों के बीच तीसरा मुकाबला वर्ष 1998 के चुनाव में भी हुआ। तब चौधरी 3190 मतों से हारे।

– करीब दस साल यानी साल 2008 के चुनाव में चौधरी ने डॉ शेजवार के समक्ष ताल ठोंकी और उन्हें 9197 वोटों से हराया।

.पिछले चुनाव में मिली हार का बदला शेजवार ने साल 2013 के चुनाव में लिया। इस मुकाबले में उन्होंने चौधरी को 20936 मतों से हराया।

– साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने गौरीशंकर शेजवार की जगह उनके बेटे मुदित शेजवार को अपना प्रत्याशी बनाया। इस बार डॉ चौधरी मुदित पर भारी साबित हुए और उन्हें 10571 मतों से हराया…

.2020 में हुए उपचुनाव में प्रभु राम चौधरी भाजपा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे और उन्होंने कांग्रेस के मदनलाल चौधरी को रिकॉर्ड 63,809 मतों से पराजित किया..

..उपचुनाव में डॉ प्रभुराम की जीत प्रदेश में पहली बार हुए 28 सीटों के उपचुनाव में भी एक रिकॉर्ड बनी।
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अंतर्कलह से जूझ रही है भाजपा

सांची Sanchi  भी उन विधानसभा Assembly सीटों में एक है,जहां भाजपा अंतर्कलह से जूझ रही है..2020 के उपचुनाव में डॉ प्रभुराम चौधरी ने भाजपा से हाथ मिलाया तो डॉ शेजवार हाशिए पर आ गए..उपचुनाव के दौरान डॉ चौधरी को पार्टी का प्रत्याशी बनाए जाने पर डॉ शेजवार व डॉ चौधरी एक जाजम पर तो बैठे लेकिन भितरघात भी जमकर हुआ…

इस मामले में पार्टी ने डॉ शेजवार को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस भी थमाया..बदले हुए हालात में डॉ शेजवार के पुत्र व इंजीनियरिंग एवं एमबीए शिक्षा प्राप्त मुदित शेजवार का राजनीतिक भविष्य अधर में है.. डॉ चौधरी की छवि लो प्रोफाइल नेता की रही है..

बीते तीन साल से स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी छवि को और अधिक निखारा है..इसी साल नवंबर अंत में चुनाव संभावित हैं.. डॉ चौधरी इस सीट से भाजपा से प्रबल दावेदार हैं.. देखना होगा कि अगले चुनाव में उनका मुख्य मुकाबला किससे होगा..कांग्रेस से या अंदरूनी सियासत से..।