रवि अवस्थी,भोपाल। उज्जैन जिले की बड़नगर विधानसभा..बीजेपी का गढ़ कहे जानी वाली इस सीट पर करीब डेढ़ दशक बाद कांग्रेस को जीत नसीब हुई..लेकिन निर्वाचित विधायक के बेटे पर अपनी ही पार्टी की एक नेत्री संग लगे दुष्कर्म व धोखाधड़ी के आरोप और गिरफ्तारी से बचने लंबी फरारी ने क्षेत्र में विधायक ही नहीं कांग्रेस को भी नुकसान पहुंचाया..
बड़नगर उज्जैन जिले का एक तहसील मुख्यालय ही नहीं…एक पवित्र धार्मिक नगर है..कभी नौलाई के नाम से इसे जाना जाता था..लेकिन 17 सौ वर्ष पूर्व एक वटवृक्ष से मां दुर्गा की मूर्ति प्रकट होने के बाद इसे नया नाम बड़नगर मिला..इसी मान्यता के चलते यहां हर साल दिवासे मेले का आयोजन होता है..जो बड़नगर नाम से बने विधानसभा क्षेत्र ही नहीं समूचे अंचल में प्रसिद्ध है..
मालवांचल की इस विधानसभा क्षेत्र में सियासत की बात करें तो यहां के मतदाताओं ने बीजेपी,कांग्रेस ही नहीं सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों का भी पूरा मान रखा..करीब 66 साल पुरानी इस सीट के लिए अब तक हुए 14 आम चुनाव हुए..इनमें 6 बार कांग्रेस तो इतनी ही बार बीजेपी व इसके पूर्ववर्ती संगठन विजयी रहे..
वहीं शुरुआती दशक में दो चुनाव सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों ने भी जीते…लेकिन मौजूदा सदी के शुरुआती तीन चुनाव में बीजेपी ने इस सीट से लगातार विजय हासिल की..यह क्रम पिछले चुनाव में कांग्रेस के मुरली मोरवाल ने तोड़ा…।
अब तक निर्वाचित विधायक,वर्ष व उनका दल
के.मेहता (1957/कांग्रेस)
रामप्रकाश (1962/सोशलिस्ट)
के.मेहता (1967/सोशलिस्ट)
अभय सिंह (1972/कांग्रेस)
उदय पंड्या (1977/जनसंघ)
उदय पंड्या (1980/बीजेपी)
अभय सिंह (1985/कांग्रेस)
उदय पंड्या (1990/बीजेपी)
सुरेंद्र सिंह (1993/कांग्रेस)
वीरेंद्र सिंह (1998/कांग्रेस)
शांतिलाल (2003/बीजेपी)
शांतिलाल (2008/बीजेपी)
मुकेश पांड्या (2013/बीजेपी)
मुरली मोरवाल (2018/कांग्रेस)
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