सुसनेरSusner assembly: जब आजादी के बाद पहली बार मतदाताओं ने चौंकाया

रवि अवस्थी,भोपाल। Susner assemblyआगर -मालवा जिले का सुसनेर विधानसभा क्षेत्र..कहा जाता है सुसनेर कृष्ण भक्तों की बस्ती है..नगर के सराफा बाजार में माहेश्वरी समाज को डेढ़ सौ साल पुराना राधा कृष्ण मंदिर इसकी बानगी है..इसे एक ही रात में तैयार किया गया था…सुसनेर में अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में निवास करते हैं..यह कभी शाजापुर जिले का हिस्सा था..सुसनेर विधानसभा को बीजेपी के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है…।

पहले जनसंघ अब बीजेपी का गढ़
सुसनेर का जिला भले ही बदला हो लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र का इतिहास मध्य प्रदेश जितना ही पुराना है..यहां पहला आम चुनाव वर्ष 1957 में हुआ..जनसंघ के हरिभाऊ जोशी यहां से पहले विधायक चुने गए..यह उनके व्यक्तित्व का ही कमाल रहा कि इस सीट से वह पांच बार और एक बार उनका बेटा विधायक चुना गया..

वर्ष 1980 के चुनाव में कांग्रेस के राणा नटवर सिंह ने जनसंघ व जनता पार्टी के विजयी रथ का रोका..तब पहली बार कांग्रेस यहां जीत का स्वाद चख पाई..लेकिन अगले ही अर्थात 1985 के चुनाव में बीजेपी के हो चुके हरिभाऊ जोशी ने एक बार फिर कांग्रेस को शिकस्त दी..1990 के चुनाव में बीजेपी के ही बद्रीलाल सोनी श्री जोशी के उत्तराधिकारी बने..

90 के दशक में बाद का समय कांग्रेस का रहा..1993 व 1998 के चुनावों में कांग्रेस के बल्लभ अम्बावतिया लगातार दो बार विधायक चुने गए..लेकिन नई सदी शुरू होते ही सुसनेर के मतदाताओं ने एक बार पुन: बीजेपी पर ही भरोसा जताया..इस तरह आजादी के बाद से कांग्रेस अब तक सिर्फ तीन बार ही सफलता अर्जित कर सकी..
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सुसनेर से अब तक के विधायक व उनका दल
1957 हरिभाऊ जोशी जनसंघ
1962 हरिभाऊ जोशी जनसंघ
1967 शिवलाल जनसंघ
1972 हरिभाऊ जोशी जनसंघ
1977 हरिभाऊ जोशी जनता पार्टी
1980 राणा नटवर सिंह कांग्रेस
1985 हरिभाऊ जोशी बीजेपी
1990 बद्रीलाल सोनी बीजेपी
1993 बल्लभ अम्बावतिया कांग्रेस
1998 बल्लभ अम्बावतिया कांग्रेस
2003 फूलचंद बेदिया बीजेपी
2008 संतोष जोशी बीजेपी
2013 मुरलीधर पाटीदार बीजेपी
2018 राणा विक्रम सिंह निर्द.अब बीजेपी
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कांग्रेस से नाता तोड़ बीजेपी के हुए राणा
90 के दशक से सुसनेर विधानसभा को लेकर एक मिथक कायम हुआ कि यहां जिस दल का विधायक जीता उसकी सरकार बनी..वहीं बीजेपी ने अपना प्रत्याशी दोहराया तो उसे पराजय झेलनी पड़ी..लेकिन वर्ष 2018 के पिछले चुनाव में सुसनेर के मतदाताओं ने चौंकाने वाला फैसला सुनाया..उसने न बीजेपी के फूल पर भरोसा जताया न कांग्रेस के हाथ के पंजे का सहारा लिया.. दोनों ही प्रमुख दलों को झटका देते हुए सुसनेर के मतदाताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी राणा विक्रम सिंह को अपना विधायक चुना..

इस तरह 25 साल बाद सुसनेर नगर को स्थानीय विधायक मिला..राणा ने बीते साल राष्टपति चुनाव से पहले बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली…इस तरह,सुसनेर में एक बार फिर बीजेपी का कब्जा हो गया है..दरअसल,राणा को राजनीति परिवार से विरासत में मिली..उनके पिता स्व.राणा नटवर सिंह 1980 में यहां से विधायक चुने गए थे..राणा का वास्ता सुसनेर की पुरानी रियासत से भी रहा..हालांकि सुसनेर विधानसभा अंतर्गत आने वाले अमरकोट किले के बारे में कहा जाता है कि इसे लगभग 12 सौ वर्ष पूर्व राजा विक्रमादित्य के वंशज अमरसिंह व सुमेर सिंह ने बनवाया था…

वर्तमान में किले की भूमि के स्वामित्व को लेकर अलग.अलग दावे हैं..बहरहाल,2018 के चुनाव में सुसनेर के मतदाताओं ने राणा विक्रम सिंह पर भरोसा जताकर सुसनेर की सियासत को गर्मा दिया..खास बात यह कि इस चुनाव में बीजेपी के मुरलीधर पाटीदार तीसरे नंबर पर रहे थे..कर्मचारी नेता से विधायक बने पाटीदार पर दूसरी बार दांव लगाना बीजेपी को तब महंगा पड़ा..
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पिछले चुनाव में कुछ इस तरह रहे थे नतीजे
उम्मीदवार            दल    मत मिले
विक्रम सिंह राणा निर्दलीय 75,804
महेंद्र सिंह परिहार कांग्रेस 48,742
मुरलीधर पाटीदार बीजेपी 43,880
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जातिगत समीकरण पर अधिक जोर
सुसनेर विधानसभा में क्षेत्र में सोंधिया, पाटीदार, राजपूत और यादव समाज के मतदाता बहुतायत में हैं..राज्य के दोनों ही प्रमुख दल इनकी आबादी के मान से ही उम्मीदवार तय करती रहे हैं..बीते चुनाव की ही बात करें तो बीजेपी ने पाटीदार समाज के मुरलीधर पर तो कांग्रेस ने सोंधिया समाज के महेंद्र सिंह परिहार पर दांव खेला..यह अलग बात है कि मतदाताओं ने दोनों के ही समीकरण बिगाड़ दिए..

बीजेपी का दामन थामने के बाद मौजूदा विधायक राणा विक्रम सिंह को 2023 के चुनाव के लिए प्रबल दावेदार माना जा रहा है..क्षेत्र में उनकी पकड़ है..लेकिन मूल व आयातित भाजपाई का झगड़ा सुसनेर में भी बताया जा रहा है..इसके चलते पार्टी कार्यकर्ता राणा से दूरी बनाए हुए है..बीजेपी की पूर्व जिलाध्यक्ष दिलीप सकलेचा व गोविंद सिंह भी दावेदारों में शामिल हैं..

वहीं कांग्रेस से सोंधिया समाज के भेरू बापू परिहार,जिला पंचायत सदस्य विजय लक्ष्मी व पूर्व विधायक बल्लभ अम्बावतिया भी टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं.. किसे मिलेगा टिकट और कौन बनेगा सुसनेर का सिकंदर इसके लिए चुनाव परिणाम तक करना होगा इंतजार..।
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कुल मतदाता 2,27,957
पुरुष मतदाता 1,18,530
महिला मतदाता 1,09,427
पाटीदार करीब 38 हजार
सोंधिया करीब 40 हजार
राजपूत करीब 15 हजार
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